सागर गिरी आश्रम से देहरादून चार सिद्ध धाम की चमत्कारी यात्रा

-वीरेन्द्र देव गौड़/एम0एस0 चौहान बीता रविवार देहरादून के लगभग 200 श्रद्धालुओं के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। देहरादून को चार सिद्ध धामों का..

-वीरेन्द्र देव गौड़/एम0एस0 चौहान

बीता रविवार देहरादून के लगभग 200 श्रद्धालुओं के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। देहरादून को चार सिद्ध धामों का आशीर्वाद प्राप्त है। ये चार सिद्ध धाम लक्ष्मण सिद्ध धाम, कालू सिद्ध धाम, मानक सिद्ध धाम और माडू सिद्ध धाम के नामों से सुप्रसिद्ध हैं। कड़वा पानी स्थित हरिओम आश्रम के महंत अनुपमा नंद गिरी महाराज और व्यास शिवोहम बाबा के मार्ग दर्शन में तेगबहादुर मार्ग, नेहरू कालोनी, राजीव नगर और नगर के अन्य क्षेत्रों से श्रद्धालु तीन बसों में सवार होकर चार सिद्ध धामों की यात्रा पर निकले। यह धर्म यात्रा तेगबहादुर मार्ग स्थित सागर गिरी आश्रम से प्रस्थान होकर सबसे पहले कालू सिद्ध धाम पहुँची कालू सिद्ध धाम जाते हुए बसों में ही अनुपमा नंद गिरी महाराज और शिवोहम बाबा का भजन कीर्तन चलता रहा। श्रद्धालु बस के अन्दर ही सब कुछ भुलाकर झूम उठे। ऐसा अध्यात्मिक आनंद शब्दों में प्रकट करना मुश्किल है। चारों ओर प्राकृतिक सौन्दर्य और बस के अन्दर भजन और सत्संग, देखते ही बनता था। प्रकृति का आनंद लिया जाए या अध्यात्म का, यह संकट भी सामने खड़ा था । लिहाजा, कुछ लोगों ने प्रकृति का आनंद भी लिया और अध्यात्म का भी। हालाँकि, अधिकतर लोग बस में सुधबुध खो कर झूम रहे थे। तीनों बसों मेें यही स्थिति थी। क्या नर, क्या नारी और क्या बच्चे, सभी भावविभोर दिखाई दे रहे थे। अधिकतर श्रद्धालुओं को पहली बार पता लगा कि अनुपमा नंद गिरी महाराज कई विधाओं में पारंगत हैं। वे सत्संग भी बहुत बेजोड़ करते हैं। रामायण और पुराणों के प्रसंगों को उठाकर सरल शब्दों में ज्ञान की बात श्रद्धालुओं के हृदय में पहुँचा देते हैं। कालू सिद्ध पीठ से धर्म यात्रा प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच से होती हुई श्री लक्ष्मण सिद्ध पहुँची। लक्ष्मण सिद्ध में भी धार्मिक रीति रिवाज पूजा पाठ सम्पन्न हुआ। भजन कीर्तन भी चलता रहा। वहाँ प्रसाद ग्रहण कर चार धाम तीर्थ यात्री मानक सिद्ध की ओर चल दिए। मानक सिद्ध भी प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है। यह सिद्ध पीठ भी माना हुआ है। यहाँ भी श्रद्धालु बस से उतर कर भजन कीर्तन करते हुए श्री मानक सिद्ध धाम की ओर बढ़े। अध्यात्म का ऐसा वातावरण भाग्यशाली श्रद्धालुओं को ही प्रात हो पाता है। यहाँ पूजा पाठ सम्पन्न कर धाम का आशीर्वाद प्राप्त कर कड़वा पानी स्थित एक छोटी सुन्दर नदी के किनारे विराजमान हरि ओम आश्रम पहुँचे। हरिओम आश्रम में प्रवेश कर ऐसा लगा जैसे हम सतयुग या कलियुग या द्वापर युग में प्रवेश कर गए हों। हरिओम आश्रम का दृश्य झकझोर कर देने वाला था। यहाँ हमें ऐसा सहज वातावरण प्राप्त हुआ जैसा अन्यत्र संभव नहीं। कड़वा पानी नदी में टहलती बतखें, सैकड़ा गायें, टीन टप्पर और ईटों से बना आश्रम, ऐसा वातावरण स्पष्ट संकेत कर रहा था कि आश्रम के संचालक अनुपमा नंद गिरी महाराज का हृदय तो बहुत बड़ा है लेकिन आश्रम के पास संसाधनों की भारी कमी है। आने वाले समय में ईश्वर ने चाहा तो यह विरोधाभास समाप्त होगा और इस महान आश्रम में ना केवल अधिक से अधिक गौ माताओं की सेवा हो पाएगी बल्कि आश्रम में और अधिक बालक बालिकाएं सुशिक्षित और संस्कारित होकर सुनहरे भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे। यहाँ भी भजन कीर्तन और सत्संग की धूम मची। श्रद्धालु महिलाओं ने नृत्य कर अपने आनंद को प्रकट किया। यहाँ दोपहर का प्रसाद ग्रहण कर संतुष्ट श्रद्धालु अपनी तीन बसों द्वारा माडू सिद्ध की ओर निकले। माडू सिद्ध के मार्ग में भी यही धर्म संकट सामने उपस्थित हुआ कि बस के अंदर भजन कीर्तन और सत्संग से मिलने वाला अध्यात्म लाभ प्राप्त करे या बस के बाहर चारों ओर बिखरे प्राकृतिक सौन्दर्य को आँखों में समेंटे। भजन कीर्तन और सत्संग चलता रहा बस भी चलती रही और श्रद्धालु माडू सिद्ध धाम के पास बसों से उतरे। इस प्रसिद्ध धाम के चारों ओर फैले प्राकृतिक सौन्दर्य को शब्दों में समेट पाना बहुत मुश्किल है। यहाँ श्रद्धालुओं को अतिरिक्त लाभ मिला। कभी-कभी पैदल चलना किसी औषधि से बढ़़ कर होता है। यहाँ पहाड़ से नीचे उतर कर सिद्ध धाम जाना और चढ़ाई चढ़ कर वापस बसों तक पहुँचना लाभ का सौदा रहा। हालाँकि , कुछ बड़ी आयु के श्रद्धालुओं के लिए यह प्रतिकूल माना गया। इस तरह लगभग 200 श्रद्धालुओं ने अनुपमा नंद गिरी महाराज की अध्यात्मिक प्रतिभा का पूरा लाभ उठाया और यह चार सिद्ध धाम यात्रा अविस्मरणीय बन गई। इस पावन यात्रा के बीच-बीच में हमें अनुपमा नंद गिरी महाराज से जुड़े लोगों के बारे में भी पता लगा जिनके लिए अनुपमा नंद गिरी महाराज सब कुछ हैं। कहने का अर्थ यह है कि अनुपमा नंद गिरी महाराज परोपकार को साथ लेकर चलते हैं। वे कोरे अध्यात्म और सत्संग में विश्वास नहीं रखते। वे आदेश देने में भी विश्वास नहीं करते बल्कि हर छोटा बड़ा काम ईश्वर का आदेश समझ कर करते हैं। ऐसे पूज्य संतों का मार्गदर्शन भारत के लोगों को मिलेगा तो भारत अवश्य ही एक बार फिर विश्व गुरू के स्तरपर पर होगा। बहरहाल, माड़ू सिद्ध का दर्शन लाभ प्राप्त कर भजन कीर्तन और सत्संग का आनंद उठाते हएु श्रद्वालु सागर गिरी आश्रम पहुँचे। यहाँ पुनः श्रद्धालुओं को पूजा पाठ के बाद रोटी सब्जी दाल का प्रसाद मिला। साथ में महाराज जी के हाथों द्वारा बनी स्वादिष्ट मिठाई का प्रसाद भी बाँटा गया। यह मिठाई कड़वा पानी में भी श्रद्धालुओं को दी गई थी। इस मिठाई की प्रशंसा के लिए अलग से एक ‘‘मिष्ठान पुराण’’ लिखा जाना चाहिए।

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