74वें गणतंत्र दिवस में स्वदेशी की छाप

-वीरेन्द्र देव गौड़ एवं एम एस चौहान साभार-नेशनल वार्ता न्यूज़ इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वदेशी भावना की छाप दिखाई देगी। इस बार राजपथ की जगह कर्तव्य पथ जैसे दो जानदार शब्द लोगों के कान में गूँजेंगे। राजपथ परतंत्रता की निशानी था। इस नाम को हटा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने…

-वीरेन्द्र देव गौड़ एवं एम एस चौहान

साभार-नेशनल वार्ता न्यूज़

इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्वदेशी भावना की छाप दिखाई देगी। इस बार राजपथ की जगह कर्तव्य पथ जैसे दो जानदार शब्द लोगों के कान में गूँजेंगे। राजपथ परतंत्रता की निशानी था। इस नाम को हटा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने मौलिकता का परिचय दिया। प्रधानमंत्री में मौलिकता का होना अनिवार्य है। ऐसा ना होने पर देश और राष्ट्र को बहुत नुकसान होता है। आज अग्रिम पंक्तियों में वे लोग विराजमान होंगे जिन्होंने सेन्ट्रल विस्टा यानी नए संसद भवन का निर्माण कर नया इतिहास रचा है। यह भी प्रधानमंत्री की मौलिकता और सूझबूझ है। वे लोग जिन्होंने अपना पसीना बहाया और शानदार इमारत तैयार की वे सचमुच आदर के पात्र हैं। उन्हें प्रधानमंत्री ने सम्मान देकर देश की राजनीति को सकारात्मक दिशा देने की कोशिश की है। इसी तरह प्रधानमंत्री ने प्रयागराज में स्वच्छता के नायकों के पाँव पखार कर एकता का संदेश दिया था। आज भी प्रधानमंत्री वही उदाहरण रखने जा रहे हैं। इसके अलावा कर्तव्य पथ पर अब नेता जी विराजमान हैं। जिन्होंने 1943 में ही भारत को स्वतंत्र घोषित कर दिया था। स्वतंत्र देश की मुद्रा तक छपवा दी थी। लगभग 10 देशों ने नेता जी की सरकार को मान्यता भी दे दी थी जिसमें तब का यूएसएसआर भी शामिल था। यह थी नेता जी की ताकत और दूरदर्शिता। सब जानते हैं कि अंग्रेज अगर किसी से डरते थे तो वह शूरवीर नेता सुभाष बाबू ही थे। उनके साथ प्रधानमंत्री मोदी ने न्याय करके देश को जगाया है। देश में बनी बन्दूकों और युद्ध उपकरणों को भी आज की परेड में प्रदर्शित किया जाना है। पाँच अग्निवीर भी पहली बार इस परेड में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे। इनमें तीन पुरूष और दो महिलाएं हैं। यही सबसे बड़ी बात है कि यह परेड स्वदेशी और स्वालम्बन का प्रतीक बनने जा रही है।इस गणतंत्र दिवस परेड में कई बातें नयेपन के साथ प्रस्तुत की जाएंगी। नई संसद में लगभग 900 जनप्रतिनिधि बैठ सकेंगे। विपक्षियों ने इस संसद भवन के निर्माण का पुरजोर विरोध किया था। ढाल बनाया था कोरोना को। कभी-कभी तो विपक्षी बिना ढाल के ही मैदान में कूद पड़ते हैं और तलवार लहराने लगते हैं। नया संसद भवन देश का गौरव है क्योंकि इसे बनाने वाले तो स्वदेशी हैं ही बनवाने वाले भी स्वदेशी हैं। इसी तरह शूरमा भोपाली विपक्षियों ने पेगेसस को लेकर भी तूफान खड़ा कर दिया था। वह तूफान भी टाँय-टाँय फिस्स हो गया। मोदी का विपक्ष ही दरअसल टाँय-टाँय फिस्स है। बहरहाल, राष्ट्र के लोगों को इस दिवस की बधाई।

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