आनंद गिरी के रक्त कैंसर पर महादेव के त्रिशूल का प्रहार

-सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव गौड़), पत्रकार,देहरादून देहरादून केदारपुर स्थित पावन सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पशुपति आश्रम के महंत आनंद गिरी महाराज आज से लगभग पाँच साल पहले तक रक्त कैंसर से पीड़ित थे। उनका कैंसर खतरनाक सीमा तक जा पहुँचा था। उन्होंने ऐलोपैथ के साथ-साथ आयुर्वेद और अन्य उपचार माध्यमों का सेवन किया। परन्तु…

-सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव गौड़), पत्रकार,देहरादून

देहरादून केदारपुर स्थित पावन सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पशुपति आश्रम के महंत आनंद गिरी महाराज आज से लगभग पाँच साल पहले तक रक्त कैंसर से पीड़ित थे। उनका कैंसर खतरनाक सीमा तक जा पहुँचा था। उन्होंने ऐलोपैथ के साथ-साथ आयुर्वेद और अन्य उपचार माध्यमों का सेवन किया। परन्तु उनके रक्त कैंसर का बुरा प्रभाव उन पर हावी होता जा रहा था। आनंद गिरी महाराज एक दिन में कई गोलियाँ हजम कर जाया करते थे लेकिन कैंसर का प्रकोप कम नहीं हुआ। महाराज ने अपने गुरु महंत अनुपमानंद गिरी महाराज के मार्गदर्शन में भगवान भोलेनाथ पर चढ़ाए जाने वाले जल के आचमन का सेवन करना प्रारम्भ किया। महंत जी द्वारा श्रद्धाभाव से ग्रहण किया जाने वाला भगवान भोलेनाथ का यह दिव्य तरल प्रसाद चमत्कार कर गया। आनंद गिरी महाराज स्वस्थ्य होने लगे। आज वे पूरे तरीके से स्वस्थ हैं। जब अंग्रेजी चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए थे। आयुर्वेद भी रक्त कैंसर की जड़ तक वार नहीं कर पाया। ऐसे संकटकाल में भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक से प्राप्त होने वाले दिव्य जल ने औषधि का काम कर दिखाया। आप इसे चमत्कार ही कहेंगे। यह भगवान भोलेनाथ का चमत्कार है। यह केदारपुर स्थित पावन शिवधाम सिद्धेश्वर महादेव के प्रति आनंद गिरी महाराज की अटूट आस्था का प्रमाण है। इसमें दो मत नहीं कि भगवान महादेव ने महंत जी पर असीम कृपा की है। अब सौभाग्य से आनंद गिरी महाराज सिद्धेश्वर महादेव के महंत के रूप में श्रद्धालुओं को अपने दिव्य ज्ञान से लाभ पहुँचा रहे हैं और क्षेत्र के श्रद्धालु सिद्धेश्वर महादेव की छत्रछाया में पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। इस पावन स्थल पर मंगलवार के दिन क्षेत्र के नौजवान सुबह-सुबह एकत्रित होकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करते हैं। तरह-तरह से क्षेत्र के श्रद्धालु इस पावन शिवधाम का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। हमने महाराज जी से यह भी पूछा की सागर गिरि आश्रम की पुण्य भूमि पर कब्जा करने के षड़यंत्र में लिप्त दुष्टों के बारे में उन्हें क्या कहना है। महाराज ने प्रतिक्रिया में कहा कि वे नागा साधु हैं। उनके गुरु अनुपमा नंद गिरि महाराज भी नागा साधु हैं। नागा साधु सच का हठ करते हैं तो फिर उस हठ से पीछे नहीं हटते। सागर गिरि आश्रम की पावन भूमि की हर हाल में रक्षा की जाएगी लेकिन स्थानीय लोगों को भी सच का साथ देना होगा। विदित रहे कि सागर गिरि आश्रम तेग बहादुर मार्ग पर स्थित है और सिद्धेश्वर महादेव मंदिर केदारपुर में स्थित है। केदारपुर बंजारावाला के अंतर्गत आता है। सरकार को इस अनावश्यक विवाद का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि सागर गिरि आश्रम के विवाद में सत्ता पक्ष के लोग भी शामिल है। हालांकि वे कभी खुलकर तो कभी छिप कर उछल-कूद कर रहे हैं। बहरहाल, पूज्य आनंद गिरि महाराज के चमत्कारिक उपचार से सनातन सांस्कृतिक परम्परा की गंभीरता का पता चलता है। यह चमत्कार इस सत्य का भी प्रमाण है कि मूर्ति पूजा का शत-प्रतिशत वैज्ञानिक आधार है।

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