अग्निपथ के अग्निवीर

साभार -नेशनल वार्ता न्यूज़ धीरे-धीरे सेना के तामझाम में बदलाव जरूरी हैं। भविष्य में युद्ध के तौर तरीके बदलने वाले हैं। सेनाओं को भविष्य के..

साभार -नेशनल वार्ता न्यूज़

धीरे-धीरे सेना के तामझाम में बदलाव जरूरी हैं। भविष्य में युद्ध के तौर तरीके बदलने वाले हैं। सेनाओं को भविष्य के लिए ढालना बहुत जरूरी है। भारत ऐसा नहीं करेगा तो यह भारत की ऐतिहासिक भूल होगी। मौजूदा केंद्र सरकार यही करने जा रही है। अग्निपथ योजना दूरगामी है। इस योजना के माध्यम से देश को तरोताजा योद्धा मिलेंगे जो किसी भी हद तक जाकर देश के दुश्मनों को युद्ध के मैदान में पराजय का स्वाद चखाएंगे। सेनाओं का आधुनिकीकरण किए बिना देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। आधुनिकीकरण के लिए धन का उचित इस्तेमाल बहुत जरूरी है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रख कर दूर की सोच कर केंद्र सरकार ने यह योजना बनाई है। जहाँ तक विपक्ष का सवाल है तो विपक्ष ने मोदी सरकार के किसी भी कानून का समर्थन नहीं किया। विपक्ष को मोदी सरकार का हर कानून काला ही काला दिखाई देता है। अब की बार विपक्ष ने अपनी रणनीति थोड़ा बदल दी है। विपक्षी अपने दलों पर निर्भर रहने वाले युवाओं को सड़कों पर उतार रहे हैं। ये रणनीति इन विपक्षियों ने जिहादियों से सीखी है। जिहादी मुल्ले मौलवी और काजी इमाम कभी भी सामने आकर जिहाद नहीं करते। ये अपने शागिर्दो को पत्थर जिहाद और पेट्रोल बम जिहाद करने के लिए सड़कों पर उतार देते हैं। सड़कों पर उतरी जिहादी सेना को बचाने वाले भी तो चाहिए। ये मुल्ले मौलवी टीवी चैनलों पर बैठकर अपने शागिर्दाें का बचाव करते हैं। उन्हें मासूम और नासमझ बताकर कानून के पंजे से बचाने की कोशिश करते हैं। अगर काजी, इमाम और मुल्ले मौलवी ना चाहें तो जिहाद संभव ही नहीं है। जिहाद इन्हीं की छत्रछाया में फलता फूलता है। अग्निपथ मामले में मोदी के विरोधी राजनीति दल इसी धूर्तता का परिचय दे रहे हैं। साधारण छात्र कभी भी किसी बस या रेलगाड़ी को आग नहीं लगा सकते। आग लगाने वाले युवा मोदी विरोधी राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं। इसीलिए उत्तर प्रदेश को छोड़ दें तो बिहार और तेलंगाना में पुलिस कमोबेश हाथ पर हाथ धरे बैठी है। सोची समझी राजनीतिक के तहत केंद्र सरकार के रेलवे विभाग को तहस-नहस किया जा रहा है। अग्निपथ की यह अग्नि आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी फैलेगी। केंद्र सरकार को सेना की सहायता से इस अग्नि को बुझाना चाहिए। सेना के डंडे पड़ेंगे तो इन कथित भावी अग्निवीरों की आग ठण्डी पड़ जाएगी। इन कथित अग्निवीरों से सख्ती से निपटना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले समय में अच्छी से अच्छी योजना पर कुठाराघात करने के लिए राजनीतिक विरोधी नए-नए छल प्रपंच रचेंगे। देश की संपत्ति का नुकसान करेंगे। देश में पूंजी निवेश की गति पर प्रश्नचिन्ह लगा देंगे। फिर कहेंगे, लो देखो मोदी से कुछ नहीं करते बन रहा। इन राजनीतिक विरोधियों ने दो साल के भयानक कोरोना काल में कोरोना से ज्यादा भयानक ताण्डव मचाया। इस ताण्डव ने देश में कोहराम मचा दिया था। मोदी विरोधी कोरोनाकाल में प्रसन्न थे। ऐसा आचरण कर रहे थे जैसे मोदी ने अपनी प्रयोगशाला में कोरोना तैयार किया हो। इन विपक्षियों ने ऐसे आपातकाल में भी सरकार का साथ नहीं दिया था। इसे भुलाया नहीं जा सकता। लिहाजा, मोदी सरकार को किसी भी सूरत में अग्निवीर योजना को लागू करना है। यह योजना देश की सेनाओं को नई धार देगी। भविष्य के लिए तैयार करेगी। भविष्य में इस योजना में कारगर सुधार होंगे और देश की सीमाएं सुरक्षित रहेंगी।

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