छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को केंद्र सरकार, शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों, राजनीतिक दलों और अपनी संगठनात्मक रणनीति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था (सिस्टम) के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। जहां भी छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आएंगे, उनकी टीम वहां मौजूद रहेगी।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शिक्षा के मुद्दे पर कहा कि यह केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं है बल्कि लगभग पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है। छात्र निराश हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। जहां भी शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठेगा, उनका संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा और उनकी आवाज बुलंद करेगा।
उन्होंने विपक्षी दलों के कमजोर होने के पीछे प्रवर्तन एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों के खिलाफ किया गया। उदाहरण देते हुए उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति का जिक्र किया और कहा कि राज्य के दो बड़े विपक्षी दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) दोनों में विभाजन हुआ। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाओं ने विपक्ष को कमजोर किया है।
लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर अपनी राय रखते हुए दीपके ने कहा कि जब नागरिक अपनी चिंताएं व्यक्त करते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी बात सुने और उस पर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है और यदि बड़ी संख्या में छात्र किसी मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं तो सरकार को उस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक मत है।
अभिजीत दिपके ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन किसी विशेष राजनीतिक दल की आलोचना करने या बचाव करने के उद्देश्य से काम नहीं करता। यदि छात्र किसी भी सरकार के कार्यकाल में समस्याओं का सामना करेंगे, तो उनका संगठन सत्ता में मौजूद किसी भी दल के खिलाफ आवाज़ उठाएगा। मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री चाहे किसी भी पार्टी से हों, उन्हें छात्रों के हितों को प्राथमिकता में रखना होगा।
अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें किसी सामाजिक या ऐतिहासिक नेता से तुलना पसंद नहीं है। उन्हें “अन्ना” या “गांधी” जैसे संबोधनों से न पुकारा जाए और वे स्वयं को उसी पहचान के साथ देखना चाहते हैं, जिसे उन्होंने अपनाया है।
राजनीतिक दलों से संपर्क के सवाल पर दिपके ने बताया कि हाल के दिनों में खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने किसी से बातचीत नहीं की। हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनसे मिलने आए थे और उन्होंने बताया कि वे राहुल गांधी की ओर से समर्थन का संदेश लेकर आए हैं। कांग्रेस के कई सांसदों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से भी समर्थन मांगा था और उनका प्रयास विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद बनाए रखने का रहा है।
नई राजनीतिक पार्टी और चुनावी राजनीति को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल देश को एक “पब्लिक प्रेशर ग्रुप” की जरूरत है। उन्होंने आपातकाल (इमरजेंसी) का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल चुनाव लड़ना हर समस्या का समाधान नहीं होता। जब लोकतंत्र पर खतरा महसूस होता है तो व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता होती है। इसी कारण फिलहाल उनका फोकस जनदबाव और जनभागीदारी के माध्यम से बदलाव लाने पर है।
उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था की उसकी कमियों के खिलाफ है। वर्तमान में केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण उनके आंदोलन का विरोध वर्तमान सरकार के खिलाफ रहा। यदि भविष्य में कोई अन्य दल सत्ता में होगा और वही समस्याएं बनी रहेंगी तो उनका संगठन उस दल के खिलाफ भी आवाज उठाएगा। संवाद और आंदोलन की रणनीति पर दिपके ने कहा कि जहां बातचीत से समाधान निकल सकता है, वहां सरकार और विपक्ष दोनों से संवाद किया जाएगा। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो उनका संगठन लोकतांत्रिक तरीके से जन-आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगा।
अपने आंदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी तत्व भेजे जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती एक महीने तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें बड़ी संख्या में अपराधियों की मौजूदगी की बात कही गई थी। दिपके ने पूछा कि यदि इतने अपराधी मौजूद थे तो उन्हें वहां रहने की अनुमति किसने दी और सुरक्षा व्यवस्था में यह चूक कैसे हुई।
कानूनी मामलों पर उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, कम से कम उनकी सुनवाई तो होनी ही चाहिए। किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं तो कानून के अनुसार मुकदमा चलना चाहिए लेकिन न्यायिक प्रक्रिया समय पर पूरी होनी भी आवश्यक है। अपने संगठन के भविष्य को लेकर दिपके ने बताया कि उनकी प्राथमिकता सबसे पहले अपनी टीम को फिर से संगठित करना है। आंदोलन की शुरुआत केवल 10 से 20 लोगों के साथ हुई थी लेकिन अब स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) की संख्या 300 से अधिक हो गई है। वे पहले सभी स्वयंसेवकों से फीडबैक लेंगे, यह समझेंगे कि आंदोलन के दौरान क्या बेहतर किया जा सकता था और किन गलतियों से बचा जा सकता था। इसके बाद संगठन की आगे की दिशा और संरचना पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
विदेश से भारत लौटने के अपने फैसले पर दिपके ने कहा कि जब वे अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे, तब सभी लोग उन्हें एक भारतीय छात्र के रूप में जानते थे। उन्होंने कहा कि उनके प्रोफेसर और मित्र उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में देखते थे लेकिन उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि अपने ही देश में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। इस अनुभव ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और इसी कारण वे वापस लौटे।
अभिजीत दिपके का बड़ा ऐलान, शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठेगा, हमारा संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा
छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को केंद्र सरकार, शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों, राजनीतिक दलों और अपनी संगठनात्मक रणनीति के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था (सिस्टम) के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। जहां भी छात्रों और शिक्षा…

Previous Post
Next Post
Leave a Reply
Latest News

Stay Connected
Categories
AGRICULTURE BOX Blog Breaking News CULTURE BOX Defence dehradun delhi Economic Box editorial emergency Film Haridwar HISTORY International literature Madhya Pradesh Mumbai Mussorie National RELIGION AND PILGRIMAGE Sports TOURISM AND PILGRAMAGE Uncategorized Uttarakhand Uttar pradesh world धर्म
Tags
About the Author

AF themes
Easy WordPress Websites Builder: Versatile Demos for Blogs, News, eCommerce and More – One-Click Import, No Coding! 1000+ Ready-made Templates for Stunning Newspaper, Magazine, Blog, and Publishing Websites.
Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports
You May Have Missed











