सुप्रीम कोर्ट का मुस्लिम दुष्टिकरण

यह देशहित में नहीं साभार-वीरेन्द्र देव गौड़ (सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला) सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम मंदिर पर अपना आरपार का फैसला दिया था। जिसके चलते..

यह देशहित में नहीं
साभार-वीरेन्द्र देव गौड़ (सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला)
सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम मंदिर पर अपना आरपार का फैसला दिया था। जिसके चलते श्रीराम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह ऐतिहासिक फैसला सत्य पर आधारित था। पाँच सौ सालों में तमाम पीढ़ियाँ राम लला की मुक्ति का सपना देखते हुए स्वर्ग सिधार गईं। सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में जितना आभार व्यक्त किया जाए वह कम ही है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई इस महान फैसले के लिए अमर हो गए। लेकिन वे भी मुस्लिम तुष्टिकरण से बाज नहीं आए। सच तो यह है तुष्टिकरण नहीं दुष्टिकरण बोला जाना चाहिए। क्योंकि तुष्टिकरण से दुष्टिकरण पैदा हो रहा है। दुष्टता बढ़ रही है। ये लोग खुद को केवल सरिया कानून का भक्त कह रहे हैं। सही मायने में इनके लिए भारत का संविधान कोई मायने नहीं रखता। अब करीब-करीब हर राजनीतिक दल दुष्टिकरण की राह पर है। ईद पर जाली टोपी धारण करना अब सैक्युलरिज्म का सर्टिफिकेट बन चुका है। जो जितनी बड़ी पार्टी कर दे वह उतना बड़ा सैक्युलर। सब कुछ मुसलमानों के पक्ष में झुक गया है। हर जगह उसी का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। इस सबके बावजूद वह यह कहने से भी बाज नहीं आता कि मुसलमान भारत में सुरक्षित नहीं। मुसलमान ने 1947 में देश तोड़ा। आज भी वह बात-बात पर देश तोड़ने की धमकियाँ देता फिरता है। ऐसी धमकियाँ देने के बाद वह फिर यह भी कहता है कि मुसलमान खतरे में। हिन्दू को समझना होगा कि ये सब जिहाद के पैंतरे हैं। जो इनके मजहब में इन्हें बाकायदा सिखाया जाता है। देहरादून से मात्र 71 किमी की दूरी पर स्थित देवबंद जिहाद का एक विश्वविद्यालय है। इसके बावजूद हिन्दू आँखें खोलने को तैयार नहीं। राम मंदिर के पक्ष में फैसला देते समय सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पाँच एकड़ जमीन मुसलमानों को देने का आदेश दिया था। यह आदेश तुष्टिकरण यानी दुष्टिकरण का ठोस प्रमाण है। मैं लेखक होने के नाते दावा कर रहा हूं कि हमारे न्यायालयों में भी दुष्टिकरण का प्रवेश हो चुका है। फिर कहना पड़ रहा है कि शायद हम मुगल काल में जी रहे हैं। शायद हम आज भी आक्रांताओं के आदेश मानने को विवश हैं। क्या जरूरत थी उन्हें पाँ एकड़ जमीन दिलवाने की। पाँच सौ साल हिन्दू को तड़पाया गया। क्या हिन्दू के अपमान की कीमत मुसलमानों को अदा की गई। क्या अदालतों को ऐसे आदेश देने चाहिएं। क्या आप भी उनसे डरते हैं। क्या अदालतों को हिन्दू या मुसलमान से डर कर फैसले करने चाहिए। यही तो तुष्टिकरण यानी दुष्टिकरण है। क्या आप भी भारत के राजनीतिक दलों की तरह व्यवहार करेंगे। ऐसे चलेगा लोकतंत्र। आप बता दीजिए किसी मुसलमान देश में लोकतंत्र है। लोकतंत्र भारत में तब तक है जब तक हिन्दू बहुसंख्यक है। अगर अदालते भी यही व्यवहार करती रहीं तो इस देश में हिन्दू अल्पसंख्यक हो जाएगा। भारत इस्लामी राष्ट्र बना दिया जाएगा। वैसे भी देश के कई जनपदों में वे बहुसंख्यक हो चुके हैं और ऐसे इलाकों से हिन्दू का पलायन शुरू हो चुका है। जागो, सच्चाई से मत भागो। सच का पक्ष लो । भारत में सब बराबर हैं। उनके साथ भारत के आदरणीय दामाद जैसा बर्ताव मत करो। उनकी धमकियों को मजाक मत समझो। वे जिहाद कर रहे हैं। यही उनका सबसे बड़ा उसूल है। पाँच एकड़ जमीन अयोध्या के गरीबों को दे दो। वैसे भी मस्जिदों की संख्या भारत में करोड़ों में है।

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