आशीष रांगण का सनातन रक्षक संगठन , देहरादून

-सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव गौड़), पत्रकार,देहरादून आशीष रांगण एक ऐसे युवा हैं जो समाज के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इनके..

-सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव गौड़), पत्रकार,देहरादून

आशीष रांगण एक ऐसे युवा हैं जो समाज के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इनके संगठन के इरादे नेक और स्पष्ट हैं। गौ सेवा, लव जेहाद विरोध, नशा मुक्ति और ऐसे ही समाज सुधार के कामोें में जुटे इस संगठन को सराहा जाना चाहिए। ऐसा नहीं कि यह संगठन केवल अपने क्षेत्र बंजारावाला और पूरे नगर देहरादून के बारे में चिंता करता हो। यह संगठन पूरे राष्ट्र की गतिविधयों पर अपनी नजर बनाए रखता है। झारखण्ड़ में 12वीं कक्षा की अंकिता को एक जिहादी ने सुबह 4.00 बजे तेल छिड़क कर जला दिया। इस दुर्घटना को इस संगठन ने बहुत गंभीरता से लिया और धर्मपुर बाईपास के पास चौराहे पर अंकिता की तस्वीर लगा कर अपना आक्रोश जताया। यह संगठन लव जेहाद के विरूद्ध अपना आक्रोश समय-समय पर प्रकट करता रहता है। यह इस संगठन की संवेदनशीलता का प्रमाण है। यह संगठन हनुमान जयंती के अवसर पर हर साल अपने क्षेत्र में पद यात्रा कर के भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करता है। बंजारावाला स्थित सिद्धेश्वर मंदिर में हर मंगलवार को सुबह यह संगठन नौजवानों को एकत्र कर भगवान हनुमान की पूजा अर्चना करता है। ऐसे प्रेरणादायी कामों से ये नौजवान क्षेत्र में जागृति लाने का काम कर रहे हैं। ऐसी जागृति से ही सामाजिक समरसता बढ़ेगी। किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए सामाजिक समरसता का होना बहुत जरूरी होता है। यही नहीं यह सनातन रक्षक संगठन ट्रस्ट गौ माता सेवा के लिए भी समर्पित है। गौ माता की सेवा के लिए इनसे जो कुछ बन पड़ता है ये नौजवान वह सब कुछ करते हैं। इन नौजवानों को अपने ही जैसे उन नौजवानों की भी चिंता है जो नशे की लत के शिकार हो चुके हैं। ये नौजवान ऐसे पीड़ित नौजवानों को भी सही रास्ता दिखाने का काम कर रहे हैं। इसी को तो समाज सेवा कहते हैं। इसमें दो मत नहीं कि हिन्दू संस्कृति पर चारों तरफ से हमले हो रहे हैं। इन हमलों में सबसे बड़ा हमला है हिन्दू माता-बहनों के खिलाफ चल रहा षड़यंत्र। इस षड़यंत्र को लोग लव जेहाद कहते हैं। वैसे जिहादी मुसलमानों के मन में हिन्दू नारियों के लिए किसी तरह का लव तो होता नहीं है। हाँ, नफरत जरूर भरी हुई है। हिन्दुओं को इसी नफरत से परेशानी है। इसलिए, नौजवानों के इस संगठन में लव जेहाद के खिलाफ जो आक्रोश है वह समझा जाना चाहिए और इसको लेकर समाज में जागृति लाई जानी चाहिए। कम से कम देहरादून और उत्तराखण्ड को तो हम लोग लव जेहाद और जमीन जेहाद से बचा ही सकते हैं। सवाल हमारे राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य का है। अत्याचार कोई भी करे उसे अत्याचारी ही कहा जाएगा। आशीष रांगण इस संगठन के अध्यक्ष हैं और हम इनके समाज सुधारक प्रयासों में इनके साथ हैं।

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