बीते रविवार देहरादून चार सिद्ध धाम धर्माटन की झलकियाँ

-वीरेन्द्र देव गौड़ एवं एम एस चौहान बीते रविवार अर्थात् 13 नवम्बर का दिन तेगबहादुर मार्ग, नेहरू कॉलोनी और राजीव नगर के श्रद्धालुओं के लिए रोमांचक रहा। इस रोमांचक धर्म फेरी का श्री गणेश तेगबहादुर मार्ग स्थित सागर गिरी आश्रम से हुआ था। हर्ष और उल्लास के साथ प्रारम्भ हुई यह धर्म यात्रा बहुत ज्ञानप्रद…

-वीरेन्द्र देव गौड़ एवं एम एस चौहान

बीते रविवार अर्थात् 13 नवम्बर का दिन तेगबहादुर मार्ग, नेहरू कॉलोनी और राजीव नगर के श्रद्धालुओं के लिए रोमांचक रहा। इस रोमांचक धर्म फेरी का श्री गणेश तेगबहादुर मार्ग स्थित सागर गिरी आश्रम से हुआ था। हर्ष और उल्लास के साथ प्रारम्भ हुई यह धर्म यात्रा बहुत ज्ञानप्रद रही। कड़वा पानी स्थित हरिओम आश्रम के महंत अनुपमा नंद गिरी महाराज और व्यास शिवोहम बाबा के मार्ग दर्शन में यह यात्रा क्यों बहुत लाभप्रद रही इसका हिसाब-किताब होना आवश्यक है। इस धर्म यात्रा में भागी रहे श्रद्धालुओं में से प्रत्येक ने महंत अनुपमानंद गिरी महाराज से कुछ ना कुछ अवश्य सीखा। किसी ने धाराप्रवाह भगवद् भजन का पाठ सीखा होगा, किसी ने लगातार ईश्वर का नाम जपते हुए असीमित ऊर्जा के स्रोत के रूप में महाराज को पाया होगा। किसी ने उनसे यह भी सीखा होगा कि ईश्वर भजन की लगन कैसी होती है। किसी ने यह भी जाना होगा कि अनुपमानंद गिरी महाराज जैसा कोई संत कुछ ठान लेता है तो वह होकर ही रहता है। कुछ भक्तों ने महंत जी में सागर गिरी महाराज के प्रति अगाध समर्पण भाव भी देखा होगा। हमने तो यह भी देखा कि जब भगवत भजन गाते-गवाते महाराज जी का गला सूख जा रहा था तब वे बड़े सहज भाव से कह रहे थे ‘‘ भाई किसी के पास पानी है पीने को’’। अब आप सोचिए कि अगर अनुपमानंद गिरी महाराज दिखावा करके कथित बड़ा संत सिद्ध होने की कोशिश करते तो उनके साथ क्या एक-दो चेले चपाटे ना होते। जिनके हाथों में चकाचक पानी की बोतलें होतीं। हमने कई नाटकीय संतों को भी देखा है। नाटकीय संत ही सनातन धर्म का बेड़ा गर्क करते हैं। जब महंत जी पानी मांगते तो जिस किसी के पास पानी की बोतल होती, वह बोतल को आगे बढ़ा देता। एक बार तो हमें स्वयं ऐसा करने का शुभ अवसर मिला। महत्वपूर्ण बात यह है कि महाराज ने एक बार भी यह नहीं पूछा कि पानी जूठा तो नहीं है। यह होती है असली संत की महिमा। कोई हम लोगों जैसा सामान्य व्यक्ति होता तो वह अवश्य पूछता कि पानी जूठा तो नहीं है। किसी पाठक को लगेगा कि ऐसी बातें भी कोई बताने लायक होती हैं क्या। पाठको, आपको असली संत की पहचान बताई जा रही है। इसके अतिरिक्त तीनों बसों में लगातार महाराज गाते-गवाते रहेे। वे सभी को जागृत अवस्था में रखना चाहते थे ताकि श्रद्धालुओं को भगवद् भक्ति का अहसास हो। श्रद्धालु अध्यात्म आनंद ले सकें और चार सिद्ध धाम यात्रा सफल हो सके। हमने तो ऐसी लगन अब से पहले किसी संत में नहीं देखी। एक बात और है अनुपमानंद गिरी महाराज अधिकतर समय बस के अन्दर खड़े होकर भजन कीर्तन और सत्संग का अमृत बाँट रहे थे। हमने उनके शारीरिक संतुलन को बिगड़ते हुए एक बार भी नहीं देखा। आज का कोई नौजवान होता तो यह कहता कि ‘‘ मैं खड़े-खड़े कैसे जाऊँगा’’। एक बात और बहुत आवश्यक है। इस बात को लेकर हम स्वयं अपराध बोध का अनुभव कर रहे हैं। इस बात के दो पहलू हैं। हमने जब पावन हरिओम आश्रम में दान पात्र देखा तो तब तक हमारी जेबें सूखाग्रस्त हो चुकी थीं। इस पाप बोध की भरपाई अगली बार की जा सकती है। लेकिन, दूसरे मामले में भरपाई संभव नहीं है। जब वहाँ आश्रम में स्वादिष्ट प्रसाद अर्थात भोजन का लाभ उठाया तो हमें यानी हम लोगों को अपनी प्लेटें स्वयं धोनी चाहिएं थीं। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस अपराध बोध की भरपाई संभव नहीं है। संतों के सम्पर्क में रह कर भी अगर हम लोगों में सुधार नहीं होता तो हमें परमेश्वर के चरण रज कैसे प्राप्त हो पाएंगे। इन तथ्यों को वैसे तो पत्रकार उजागर नहीं करते। लेकिन हम लोग पत्रकार बनें या ना बनें अच्छे आदमी बनने के प्रयास में अवश्य हैं। यह भी कहना अनिवार्य है कि हम श्रद्धालुओं को ना केवल सागर गिरी आश्रम में धीरे-धीरे हर अव्यवस्था को दूर करना है बल्कि हरिओम आश्रम में झलक रही संसाधनों की कमियों को दूर करने में भी अपना-अपना योगदान करना होगा। योगदान करने का कोई नियत समय नहीं होता लेकिन योगदान करने का अवसर आना अवश्य चाहिए। अनुपमानंद गिरी महाराज के कर कमलों से बनी मिठाई इतनी स्वादिष्ट थी कि कुमार स्वीट शॉप भी शर्मसार हो जाए। हमने महाराज की मिठाई का आनंद बाखूबी उठाया उनके भजन कीर्तन और सत्संग का भी भरपूर लाभ उठाया। इसका अर्थ यह हुआ है कि बीते रविवार हम सबको मिठाई ही मिठाई खाने को मिली। ऐसी मिठाई जो हर श्रद्धालु को किसी ना किसी ढंग से लाभ पहुँचाएगी। अनुपमानंद गिरी महाराज के बारे में तो यही कहा जा सकता है कि ‘‘ हरि अनंत हरि कथा अनंता’’। इसका अर्थ यह है कि अनुपमानंद गिरी महाराज अपने अस्तित्व का कण-कण समाज को दे देना चाहते हैं। हम लोगों ने ब्रह्मलीन श्री 1008 सागर गिरी महाराज को लेकर अध्ययन किया है। इसलिए यह तथ्य समझते हैं कि वे बहुत बड़े संत थे। वे आत्मा और परमात्मा का एकाकार अनुभव करने वाले संत थे। हमारे अनुपमानंद गिरी महाराज भी इसी चरम की ओर बढ़ रहे हैं। इसीलिए तो अब महाराज जी योग के माध्यम से भी हम सबका उद्धार करने की ओर पग बढ़ाने जा रहे हैं। सागर गिरी महाराज की कृपा अनंत है। हम सब भाग्यशाली हैं कि हम सागर गिरी महाराज आश्रम की छत्रछाया में आया-जाया करते हैं। सबसे बढ़कर यह कि अनुपमा नंद गिरी महाराज जहाँ भी विराजमान होते हैं और जो भी उनके संपर्क में आता है- ऐसा लगता है कि सब उन्हीं के परिवार के सदस्य हैं।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

Easy WordPress Websites Builder: Versatile Demos for Blogs, News, eCommerce and More – One-Click Import, No Coding! 1000+ Ready-made Templates for Stunning Newspaper, Magazine, Blog, and Publishing Websites.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports