Wednesday, October 5, 2022
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महाराष्ट्र के महाअघाड़ी का बिहार में पुनर्जन्म

-सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव), पत्रकार,देहरादून

जो लोग पुनर्जन्म में विश्वास नहीं रखते उन्हें मैं प्रमाण देने जा रहा हूँ कि पुनर्जन्म एक वास्तविकता है। आप ने महाराष्ट्र में महाअघाड़ी की नौटंकियाँ देखी होंगी। महाअघाड़ी की वे नौटंकियाँ और लूटपाट महाअघाड़ी को ले डूबीं। जिन लोगों का विवेक पूरा नहीं मरा था वे भाजपा की मदद से महाअघाड़ी को दुलत्ती लगाने में सफल रहे। अगर इनका विवेक पूरा जाग जाएगा तो महाराष्ट्र में बाकी दो साल में ये काफी काम कर सकते हैं। बिहार में इसी मरी हुई महाअघाड़ी का फिर से जन्म हो चुका है। बिहार की महाअघाड़ी भस्मासुर बनने वाली है। ये भस्मासुर प्रदेश की स्थिति को तहस नहस कर देगा। बाद में यह भस्मासुर खुद भी भस्म हो जाएगा लेकिन तब तक बिहार का बहुत अधिक नुकसान हो चुका होगा। प्रधानमंत्री मोदी देश को विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं। लेकिन राजनीतिक दलों के लिए राजनीति का मतलब हो गया है मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनना। किसी भी कीमत पर राजा रानी बन कर रहना और देश के संसाधनों पर अय्यासी करना। बिहार में जो गठबंधन बना है वह 100 प्रतिशत अवसरवादी है। 100 प्रतिशत अराजकतावादी है। इस महागठबंधन के राज में 1995 से 2005 तक जंगलराज था। यह टिप्पणी किसी नेता नहीं की थी। यह टिप्पणी बिहार के हाईकोर्ट ने की थी। सवाल हाईकोर्ट का भी नहीं है। सवाल है सच्चाई का। जरूरी नहीं कि हाईकोर्ट नहीं कहता तो यह बात गलत हो जाती। बिहार को जंगल राज बनाने वालों के हाथ में ही अब बिहार है। बिहार के लोगों को लालू के छोकरों की राजग की असलियत अब पता लग जाएगी। पलटूराम यानी नीतीश कुमार की काबलियत का भी लोगों को अब सही-सही अंदाजा हो जाएगा। जिस तरह महाराष्ट्र की महाअघाड़ी ने अली बाबा और 40 चोर की मंडली बन कर महाराष्ट्र को लूटा उसी प्रकार बिहार का यह महा गठबंधन दोनों हाथों से बिहार को लूटेगा। बिहार के आम आदमी का अब ना जाने क्या होगा। वहाँ की औरतों को अब कौन बचाएगा। वहाँ हाहाकार मचने वाला है। समझ में नहीं आता कि लोग ऐसे महा अवसरवादियों को वोट देते कैसे हैं। लोग क्यों राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। लोग क्यों नहीं समझ रहे हैं कि रेवड़ीवाद देश के भविष्य को श्रलंका बना देगा। लोगों को अपने वोट की कीमत समझनी होगी। देश के हित में काम करने वालों को वोट देना होगा। जातापात के जहर को मारना होगा। हालाँकि हमारा संविधान खुद जातापात को बढ़ावा दे रहा है। मजहबवाद को पालपोस रहा है। बिहार में मजहबवाद भी अपना नागफन उठाने वाला है। देश को समझना होगा कि जातापात और मजहब के खिलाफ एकजुट होकर राष्ट्र को मजबूत बनाना है।

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