रामनवमी और हनुमान जयंती मनाना छोड़ दो

गलती हिन्दू की है लेखक: वीरेन्द्र देव गौड, पत्रकार, देहरादून साभार-नेशनल वार्ता ब्यूरो गलती हिन्दू की है कि वह अपने सबसे बड़े आराध्य जिनकी पूजा..

गलती हिन्दू की है

लेखक: वीरेन्द्र देव गौड, पत्रकार, देहरादून

साभार-नेशनल वार्ता ब्यूरो

गलती हिन्दू की है कि वह अपने सबसे बड़े आराध्य जिनकी पूजा स्वयं महादेव करते थे, उनकी शोभा यात्रा निकालता है। गलती हिन्दू की है कि वह हनुमान जयंती में श्रद्धा के साथ शोभा यात्रा निकालता है। हिन्दू को ऐसा नहीं करना चाहिए। जिहादी मानसिकता के मुसलमान को अपार कष्ट होता है। उसके खुदा को परेशानी होती है। पाक मस्जिद के आसपास हिन्दू को न तो आशियाना बनाना चाहिए और न ही शोभा यात्राएं निकालनी चाहिएं। ऐसा करेंगे तो पिटेंगे मरेंगे और आग के हवाले कर दिए जाएंगे। ऊपर से हमारा देश एक सेक्युलर देश है। इस देश में ताजिया जैसे जुलूस पर कभी कोई पत्थर तो क्या फूल तक नहीं फेंकता। इसलिए क्योंकि वे हमारे ऊपर हुकूमत करने के लिए जन्में हैं। वे कभी सल्तनतें चलाते थे। वे कभी मुगल हुआ करते थे। वे कभी कभार इक्का दुक्का मामलों में हिन्दुओं के साथ स्वतंत्रता संग्राम लड़ लिया करते थे। वे मोहम्मद गौरी थे। वे कभी सोमनाथ मन्दिर को मिट्टी में मिला देने वाले मोहम्मद गजनवी थे। वे ही तो बाबर हुआ करते थे। जिन साहिबान ने श्रीराम के भारत में सबसे भव्य मन्दिर को अयोध्या में जाकर तहस नहस किया था और उसकी छाती पर बाबरी मस्जिद खड़ी कर दी थी। ऐसी धरती की महान कौम को ज़रा भी कष्ट दोगे तो नष्ट कर दिये जाओगे। हर मुख्यमंत्री देश का योगी आदित्यनाथ नहीं हो सकता। जिसके लिए सब बराबर हैं। जो हिन्दू हो या मुसलमान माफियागिरी करने पर बुल्डोजर फेर देता है। जिसके लिए राजधर्म सर्वोपरि है। दिल्ली में मुसलमानों के प्रिय नेता केजरीवाल जब तक मुख्यमंत्री रहेंगे तब तक कोई माई का लाल दिल्ली में हिन्दुओं के शोभा जुलूसों पर आग बरपाने से उन्हें नहीं रोक सकता। अगर ये माननीय दिल्ली के मुख्यमंत्री न होते तो गैर कानूनी शाहीन बाग चार दिन न टिक पाता। अरे केजरीवाल अगर पुलिस अमित शाह के अधीन है तो डीएम और एसडीएम तो तेरे अधीन हैं रे। तू क्यों नहीं बुल्डोजर फेर देता। बुल्डोजर देवता इतने मँहगे भी नहीं हैं। अपने दफ्तर के बाहर चार बुल्डोजर क्यों नहीं खड़े कर देते हो। पूरे एक साल राकेश टिकैत जिसे बच्चे राकेश डकैत कहने लगे हैं। अपने संगीसाथियों के साथ दिल्ली की सीमाओं पर शानदार तम्बुओं में सुल्तान का जीवन जीता रहा। उसे आप बिजली पानी मुफ्त देते रहे। मोदी की जड़ों पर मठ्ठा डालते रहे। फिर खालिस्तानियों और टिकैत समर्थकों की भरपूर दिनरात सेवा के बदले पंजाब जीत गए। अरे, इस तरह बनोगे देश के प्रधानमंत्री। आप, मुफ्तवाद को हवा देकर स्वावलम्बन को गड्ढे में धकेल कर दिल्ली को दारू में तर-बतर कर के बनोगे देश के प्रधानमंत्री। अमानतुल्लाओं और ताहिर हुसैनों को पालोगे जो सुल्तान होने का खयाल मन में लिए हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलते हैं। दिल्ली में जब भी जिहादी दंगे होते हैं आप पल्ला झाड़ कर पतली गली से निकल लेते हैं। आप देश भक्त नहीं हैं। आप एक पागल महत्वाकाँक्षी हैं। इसलिए आपकी ईमानदारी का भी कोई अर्थ नहीं रह जाता। आप भारत वर्ष के इतिहास में खलनायक कहे जाओगे। समय है, सुधर जाओ।

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