Thursday, September 29, 2022
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नूपुर बहाना जिहाद है बरपाना

-वीरेन्द्र देव गौड़, पत्रकार, देहरादून

साभार -नेशनल वार्ता न्यूज़

जिनका स्वभाव है जिहाद वे जिहाद कैसे छोड़ दें। बहाना ना भी हो तो भी जिहाद चौबीसो घंटे चलने वाली प्रक्रिया है। अगर बहाना मिल जाए तो सोने में सुहागा। जयपुर में यही हो रहा है। वहाँ का तो मौसम भी जिहादियों के अनुकूल है। वहाँ ऐसी पार्टी का शासन है जो जिहादियों के खिलाफ कभी नहीं जाती। जो ईसाइयत के खिलाफ भी कभी नहीं जाती। फिर वे चाहे कुछ भी कर गुजरें। हाँ, हिन्दुओं के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को ये तैयार बैठी रहती है। क्योंकि पूरा संसार जान चुका है कि हिन्दू का स्वभाव है बँट कर रहना। हिन्दू जात पात और पंथ में बँटा हुआ है। कोई शनि को भगवान मान कर पूज रहा है तो कोई साईं को भगवान बनाकर पूज रहा है। हिन्दू तब तक एक था जब तक वह ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चरणों में नत् मस्तक रहता था। अब हिन्दू ब्रह्मा, विष्णु और महेश से दूर होता चला जा रहा है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश हिन्दू के सनातन धर्म का आधार रहे हैं। पहले तो इन तीन भगवानों के प्रति हिन्दू की श्रद्धा इतनी गहरी थी कि हर हिन्दू को देव माना जाता था। ये तीन भगवान देवों के देव माने जाते थे। जब से भारत की धरा पर महावीर और बुद्ध का अवतरण हुआ तब से हिन्दू बँटता ही चला गया और आज भी बँटता ही जा रहा है। बुद्ध और महावीर के अवतरण से पहले संसार की किसी शक्ति में हिम्मत नहीं थी कि वह भारत की ओर आँखें उठाकर देख सके। हिन्दू स्वभाव से इतिहास में रूचि नहीं लेता है इसीलिए वह दूर की सोच पाने में असमर्थ है। इतिहास हमें खड़े होने के लिए मजबूत जमीन देता है। जिस जमीन पर खड़े होकर हम मजबूती से भविष्य की ओर ताक सकें। बुद्ध और महावीर के अवतरण के बाद ईशा मसीह का अवतरण हुआ और ईशा मसीह के अवतरण के लगभग 550 साल बाद उस मजहब का अवतरण हुआ जो 60 मुल्कों में पसर चुका है। जो भारत को निगल जाने के लिए आतुर है। मगर हिन्दू है कि वह समझने को तैयार नहीं। नूपुर शर्मा तो आज की पैदाइश है। कोई इनसे पूछे कि 14सौ साल पहले तुम क्यों भड़के थे। किस नूपुर शर्मा के बयान से भड़क कर आज के खाड़ी कहे जाने वाले इलाके में मन्दिरों और मूर्तियों को ध्वस्त किया था। अरे हमें 14 सौ साल पहले वाली नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिन्दल के नाम तो बता दो। सच तो यह है कि सलमान रूश्दी ने जो कहा था वह सच ही कहा था। अरे, खुलकर बोला करो कि तुम्हारी तासीर क्या है। सब तो नहीं लेकिन कुछ हिन्दू भी निडर और वीर स्वभाव के होते हैं। वे तुम्हारी साफगोई से तुम पर प्रसन्न होंगे। घुमाफिरा कर मत बोला करो। आरएसएस को बहाना बनाकर पेश मत किया करो। वे तो निष्क्रिय पड़े रहते हैं। वे भारत नहीं हैं और भारत वे नहीं हैं। आरएसएस से बाहर भी भारत माता की जय बोलने वाले लोग हैं और राष्ट्र को भारत माता की तरह पूजते हैं। सीधे-सीधे बोला करो कि तुम्हें जिहाद करना है और तुम वही कर रहे हो। तुम्हें गजवा-ए-हिन्द और मुस्तफा की हुकूमत कायम करनी है और तुम इसी मकसद पर डटे हुए हो। कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से मणिपुर तक तुम यही सब कर रहे हो। सच बोलोगे तो हमें अच्छा लगेगा। घुमाफिरा कर बहाने बना कर जिहाद बरपाओगे तो हमें बहुत बुरा लगेगा। हमें पता है कि धरती पर लगभग 60 मुल्क तुम्हारे हैं और वे ऐसे ही बने हैं। जयपुर में एक बहुत बड़ा जलसा करके तुम लोग नूपुर शर्मा और आरएसएस को कोस रहे हो। तुम वहाँ बैठ कर तोकीर रजा जैसे मँजे हुए जिहादियों की मदद से जिहाद का ऐलान कर रहे हो। ठीक है करो क्योंकि तुम्हारा मजहब तुम्हें यही सिखाता है। हमें तो हिन्दुओं से शिकायत है। जो गंगा जमुनी तहजीब कह-कह कर हिन्दू को बरगला रहे हैं। तुम लोग बरगलाओ तो चलेगा पर हिन्दू आज भी राजा मान सिंह और बीरबल बन कर इस्लाम की खिदमद करेगा तो हमें बर्दाश्त नहीं है। क्योंकि भारत के अस्तित्व का सवाल है। तुम मिटाते रहो लेकिन हम मिटने नहीं देंगे। हाँ, यह बात भी सच है कि बुद्ध और महावीर के उत्थान के बाद भारत बाहरी आक्रांताओं से पिटने लगा था। भारत बुरी तरह से बँटने लगा था। यहाँ जो कुछ कहा जा रहा है वह सच्चे इतिहास का निचोड़ है। देवबंद हो, बरेली हो, कानपुर हो, मुरादाबाद हो, हावड़ा हो, कश्मीर हो, भाग्यनगर जिसे तुम हैदराबाद कहते हो, वह हो, तुम सब जगह जिहाद कर रहे हो। जिहाद और जिहादी आतंक में केवल हथियारों का फर्क है और कुछ नहीं। जिस दिन हिन्दू यह समझ जाएगा उसी दिन से भारत की तकदीर सँवरनी शुरू हो जाएगी।

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