Wednesday, October 5, 2022
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उत्तर प्रदेश में जिहादियों की तुड़ान

साभार -नेशनल वार्ता न्यूज़

बुलडोजर बाबा ने जिहादियों की तुड़ान शुरू कर दी है। दूसरे राज्यों में जहाँ दुनिया के कथित सबसे बड़े दल की सरकारें नहीं हैं वहाँ तो दुष्टिकरण चल रहा है। किन्तु कम से कम उत्तर प्रदेश में बुलडोजर बाबा के रहते हुए राम राज्य की रौनक दिख रही है। रामराज्य में खलनायक सजा का पात्र होता है। भले ही खलनायक कोई भी हो। जिहादी खलनायकों का जो इलाज उत्तर प्रदेश में हो रहा है वही पूरे देश में होना चाहिए। लेकिन ऐसा होगा नहीं। लोकतंत्र की जान है वोट। जिहादी मानसिकता वालों का वोट भला कौन खोना चाहेगा। बुलडोजर बाबा जिहादी मानसिकता वालों का वोट नहीं चाहते। बुलडोजर बाबा यथार्थ जानते हैं। वे किसी निराधार खुशफहमी में नहीं रहते। उन्हें पता है कि जालीदार टोपी वाले उनसे नफरत करते हैं। हालाँकि, बुलडोजर बाबा किसी से नफरत नहीं करते। वे तो बार-बार चेताते रहते हैं कि जिन्हें दंगा और तोड़फोड़ करनी है वे या तो प्रदेश से निकल जाएं या फिर शांति से रहें। जब जिहादी मानसिकता वाले खलनायक मानते ही नहीं। बुलडोजर बाबा के रहते जुम्मा जिहाद कर देते हैं तो भला उनका इलाज क्यों न किया जाए। उत्तर प्रदेश में एक जगह तो एक पुलिस वाले ने जुम्मा जिहादियों की टाँगों पर लाठियाँ चलाईं। जब जुम्मा जिहादी पुलिस वालों पर पत्थर और पेट्रोल बम चलाएंगे तो पुलिस वालों को हाथ की खुजली मिटाने का अधिकार मिलना ही चाहिए। जुम्मा जिहादियों के मानवाधिकार तलाशने वाले तो बहुत मिल जाएंगे किन्तु पुलिस वालों के मानवाधिकार की कोई बात ही नहीं करता। उनके भी तो मानवाधिकार होते हैं। लिहाजा, बुलडोजर बाबा ने पिछले जुम्मे में कानुपर में बरपाए गए जुम्मा जिहाद के  दोषियों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। एक जुम्मा जिहादी की बहुमंजिला इमारत पर बुलडोजर फेर दिया है। यह शुरूआत है। जुम्मा जिहादियों के गैर कानूनी भवनों को गिरा दिया जाएगा। ऐसा होना ही चाहिए। जुम्मा जिहाद पर विराम लगना ही चाहिए। बहाना कुछ भी हो जिहाद और जिहादी आतंक की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। अगर हिन्दू हर मंगलवार को इसी तर्ज पर मंगल जिहाद करना शुरू कर दे तो क्या मुसलमानों के अस्तित्व पर संकट नहीं आ जाएगा। क्या जिहादी मानसिकता वाले इस बात पर विचार करेंगे। नहीं करेंगे। क्योंकि 14 सौ सालों से चल रहा है यह सब। यह सब बंद करने के लिए भारत के संविधान को ही बदलना पड़ेगा। जोकि असंभव लग रहा है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि संविधान तो बदला जा सकता है मगर देश नहीं बदला जा सकता है। कुछ समझे। नहीं समझे तो समझो। हिन्दू राष्ट्र के अस्तित्व का सवाल है भाई।

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